भारतीय बैंकिंग संरचना: मौद्रिक नियंत्रण और संस्थागत साख तंत्र
ताज़ा विनियामक घटनाक्रम: को भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकिंग ढांचे के संबंध में समेकित वैधानिक दिशा-निर्देश जारी किए, जिसके तहत सभी वाणिज्यिक तथा सहकारी बैंकों के लिए पूंजी बफर और वित्तीय निगरानी के नियम सख्त किए गए हैं।
महानगरीय जलापूर्ति ग्रिड का व्यावहारिक उदाहरण
बैंकिंग तंत्र किसी बड़े शहर के पानी वितरण तंत्र जैसा है।
इस पूरे तंत्र के शिखर पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) जल प्राधिकरण की तरह काम करता है। यह मुख्य जलाशय का स्तर जांचता है, पानी की शुद्धता देखता है, पाइपों का दबाव तय करता है और सुरक्षा वॉल्व संभालता है। जलाशय से साफ पानी विशाल भूमिगत पाइपों के जरिए निकलता है; ये अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक हैं। वे औद्योगिक केंद्रों और घनी आबादी वाले मोहल्लों तक भारी मात्रा में पूंजी पहुंचाते हैं।
दूरदराज के इलाकों में बड़ी पाइपलाइनें नहीं पहुंच पातीं। वहां नगर निगम विशेष बूस्टर पंप और छोटे पानी के टैंकर भेजता है। वित्तीय जगत में यह काम क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs), लघु वित्त बैंक (SFBs) और बैंक मित्र संभालते हैं।
दबाव का नियंत्रण जीवन-मरण का प्रश्न है। मुख्य वॉल्व जरूरत से ज्यादा खुल जाए, तो पाइपलाइनें फट जाती हैं और गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (NPA) तथा अनियंत्रित मुद्रास्फीति फैलती है। दूसरी ओर, यदि वॉल्व बहुत कस दिया जाए, तो कारखाने बंद हो जाते हैं और नकदी के सूखे से आर्थिक विकास रुक जाता है।
त्रि-स्तरीय संस्थागत रूपरेखा
भारत में साख वितरण तीन स्तरों पर संचालित होता है।
स्तर 1: शीर्ष नियामक व रणनीतिक कमान
यह स्तर भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई अधिनियम, 1934) और वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) के अधीन काम करता है।
- मौद्रिक स्थिरता: छह सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को 4% (±2%) के दायरे में बनाए रखती है।
- वैधानिक आरक्षित अनुपात: बैंक अपनी कुल देनदारियों (NDTL) का एक हिस्सा नकद आरक्षित अनुपात (CRR) के रूप में बिना ब्याज के रिज़र्व बैंक के पास जमा रखते हैं। साथ ही, वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) के तहत 18.00% पूंजी सरकारी प्रतिभूतियों में लगानी होती है।
- पूंजी पर्याप्तता नियम: अंतरराष्ट्रीय बेसल-III मानकों के अनुसार, बैंकों को जोखिम-भारित परिसंपत्तियों के मुकाबले न्यूनतम 9.0% पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) रखना अनिवार्य है, जो बफर मिलाकर 11.5% बैठता है।
स्तर 2: वित्तीय संचरण माध्यम
यह स्तर जनता से जमा पूंजी जुटाता है और उसे ऋण के रूप में बाजार में भेजता है।
बारह समेकित सरकारी बैंक विशाल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं का वित्तीय भार उठाते हैं। निजी और विदेशी बैंक अंतरराष्ट्रीय व्यापार, बड़े कॉरपोरेट कर्ज और आधुनिक डिजिटल भुगतान प्रणालियों को गति देते हैं। लघु वित्त बैंक 75% प्राथमिकता ऋण कोटे के साथ छोटे उद्यमियों को पूंजी देते हैं, जबकि पेमेंट्स बैंक ₹2 लाख तक की जमा स्वीकार करते हैं किंतु उन्हें ऋण देने का अधिकार नहीं है।
स्तर 3: ज़मीनी स्तर पर अंतिम छोर तक वितरण
यह स्तर नीतिगत निर्णयों को आम नागरिक के हाथों में नकदी के रूप में पहुंचाता है।
नाबार्ड और रिज़र्व बैंक के अधीन काम करने वाले 43 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक तथा प्राथमिक सहकारी समितियां किसानों को फसली ऋण देती हैं। जैम (JAM) व्यवस्था के सहयोग से खुले 53 करोड़ जन धन खाते इस तंत्र की आधारशिला हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के जरिए बिना बंधक रखे तीन श्रेणियों में साख दी जाती है: शिशु वर्ग में ₹50,000 तक, किशोर वर्ग में ₹5 लाख तक और तरुण वर्ग में ₹10 लाख तक के ऋण बांटे जाते हैं।
त्वरित विनियामक तथ्य
| संस्थागत आयाम | विनियामक मानक व वैधानिक सीमा |
|---|---|
| नियामक ढांचा | आरबीआई अधिनियम 1934; बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949; वित्त मंत्रालय। |
| अनिवार्य अनुपात | SLR: 18.00%; न्यूनतम CRAR: 9.0% (बफर सहित 11.5%); PSL: 40% (वाणिज्यिक बैंक), 75% (SFB/RRB)। |
| नेटवर्क विस्तार | 12 सार्वजनिक बैंक, 21 निजी बैंक, 12 लघु वित्त बैंक, 43 RRBs; 53+ करोड़ जन धन खाते। |