वर्ष 1916 के होम रूल आंदोलन ने भारतीय राष्ट्रवाद को कैसे गढ़ा
मुख्य परीक्षा विषय एवं अवधारणाएँ
- होम रूल आंदोलन (1916): ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर स्वशासन की माँग को लेकर चलाया गया अभियान, जिसने ब्रिटिश भारत में 200 से अधिक शाखाओं की स्थापना की; भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (UPSC GS-I, राज्य लोक सेवा आयोग, SSC) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।
- लखनऊ समझौता (दिसंबर 1916): एक ऐतिहासिक समझौता जिसके तहत कांग्रेस के नरम दल और गरम दल का पुनर्मिलन हुआ तथा मुस्लिम लीग के साथ एक संयुक्त मोर्चा तैयार हुआ।
- मोंटेगू घोषणा (अगस्त 1917): राज्य सचिव एडविन मोंटेगू द्वारा दिया गया नीतिगत भाषण, जिसमें स्वशासित संस्थाओं के क्रमिक विकास का वादा किया गया और जो सीधे तौर पर भारत सरकार अधिनियम, 1919 का आधार बना।
हालिया संदर्भ
ऐतिहासिक समीक्षाओं ने 1916 के होम रूल आंदोलन की 110वीं वर्षगांठ का स्मरण किया, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि कैसे 200 से अधिक स्थानीय लीग शाखाओं ने आधुनिक भारतीय जन-राजनीतिक संघर्ष की रूपरेखा तैयार की थी।
बड़ा सवाल
क्या आपने कभी सोचा है कि भारत का राजनीतिक संघर्ष कैसे कुछ गिने-चुने लोगों द्वारा बैठक कक्षों में की जाने वाली याचिकाओं से निकलकर एक देशव्यापी जन-आंदोलन में बदला?
1916 ने भारतीय प्रतिरोध को कैसे नया आकार दिया
यह समझने के लिए कि भारत ने अपनी स्वतंत्रता कैसे प्राप्त की, हमें वर्ष 1916 की ओर देखना होगा। इस क्षण से पहले, ब्रिटिश भारत में राजनीतिक कार्रवाई काफी हद तक विभाजित थी। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अभी भी 1907 के सूरत विभाजन से उबर रही थी।
दो दूरदर्शी नेताओं ने महसूस किया कि अधिकारों के लिए केवल अनुरोध करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें एक ऐसे अनुशासित संगठन की आवश्यकता थी जो नागरिकों को शिक्षित कर सके और राजनीतिक दबाव बनाए रख सके।
1916: दोहरी लीग संरचना
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│ बाल गंगाधर तिलक │ │ एनी बेसेंट │
│ शुरुआत: अप्रैल 1916 │ │ शुरुआत: सितंबर 1916 │
│ मुख्यालय: बेलगाम │ │ मुख्यालय: मद्रास │
│ कार्यक्षेत्र: 6 शाखाएँ │ │ कार्यक्षेत्र: ~200 शाखाएँ │
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लखनऊ समझौता (दिसंबर 1916)
(कांग्रेस और मुस्लिम लीग का पुनर्मिलन)
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मोंटेगू घोषणा (अगस्त 1917)1. दो शक्तिशाली इंजन: तिलक और बेसेंट
अप्रैल 1916 में, बाल गंगाधर तिलक ने बेलगाम में इंडियन होम रूल लीग की शुरुआत की। तिलक ने कर्नाटक, मध्य प्रांत, बरार और महाराष्ट्र में 6 क्षेत्रीय शाखाओं की स्थापना की। उन्होंने वह प्रसिद्ध नारा दिया: "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा।"
इसके पाँच महीने बाद, सितंबर 1916 में, एनी बेसेंट ने मद्रास में ऑल इंडिया होम रूल लीग का उद्घाटन किया। जहाँ तिलक ने गहरी क्षेत्रीय जड़ें जमाईं, वहीं बेसेंट ने उत्तर तथा दक्षिण भारत में लगभग 200 स्थानीय शाखाओं का विस्तार किया।
2. राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक: दिसंबर 1916 का लखनऊ समझौता
राजनीतिक दबाव तब सबसे अच्छा काम करता है जब नेता एक एकजुट मोर्चा पेश करते हैं। दिसंबर 1916 में इस आंदोलन ने ऐतिहासिक लखनऊ समझौते को जन्म दिया।
- नौ साल के अलगाव के बाद कांग्रेस के भीतर नरम दल और गरम दल के गुटों को फिर से मिला दिया।
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच एक संयुक्त संवैधानिक माँग का मार्ग प्रशस्त किया।
3. साम्राज्य का झुकना: अगस्त 1917 और 1920 का संक्रमण
ब्रिटिश सरकार जनमत को एकजुट करने वाली 200 से अधिक सक्रिय लीग शाखाओं की अनदेखी नहीं कर सकती थी। इस दबाव के जवाब में, एडविन मोंटेगू ने 20 अगस्त 1917 को मोंटेगू घोषणा जारी की। इतिहास में पहली बार ब्रिटिश राजशाही ने भारत में स्वशासित संस्थाओं के क्रमिक विकास का आधिकारिक वादा किया।
वर्ष 1920 तक, इस आंदोलन ने अपनी भूमिका पूरी कर ली। ऑल इंडिया होम रूल लीग ने महात्मा गांधी को अपना अध्यक्ष चुना, अपना नाम बदलकर स्वराज्या सभा कर लिया और असहयोग आंदोलन के लिए अपने पूरे संगठनात्मक ढाचे को कांग्रेस में विलीन कर दिया.
मुख्य शब्दावली स्पष्टीकरण
होम रूल (डोमिनियन स्टेटस): एक साम्राज्य के भीतर ऐसा स्वशासन जहाँ स्थानीय नागरिक घरेलू नीतियों का प्रबंधन करते हैं जबकि विदेश मामले साझा रहते हैं।
लखनऊ समझौता (1916): कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच तैयार किया गया एक एकीकृत राजनीतिक मंच।
स्वराज्या सभा: 1920 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में होम रूल लीग का बदला हुआ नाम।
आगे क्या?
- शैक्षणिक पुनर्मूल्यांकन: राज्य शिक्षा बोर्ड और केंद्रीय विश्वविद्यालय निकाय 1916-1920 के अभिलेखागार से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों को पाठ्यक्रमों में शामिल कर रहे हैं।
- डिजिटल पुरालेख: राष्ट्रीय अभिलेखागार क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशित पर्चे को डिजिटल रूप दे रहा है।
- प्रतियोगी परीक्षा के लिए दृष्टिकोण: परीक्षार्थियों को होम रूल आंदोलन, मोंटेगू घोषणा और भारत सरकार अधिनियम, 1919 के बीच सीधे संबंधों का परीक्षण करने वाले प्रश्नों की तैयारी रखनी चाहिए।