Literature & Heritage 📅 18 October 2026 ✍️ Dr. Vikramaditya Sen

दुर्गा पूजा: कला, अर्थव्यवस्था और संवैधानिक कर्तव्य

दुर्गा पूजा: जीवंत सांस्कृतिक धरोहर, लोक आर्थिकी और संवैधानिक कर्तव्य

कल की हलचल: 18 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए दुर्गा पूजा को नारी शक्ति के संवैधानिक संकल्पों को धरातल पर उतारने वाला उत्सव और ₹32,000 करोड़ से अधिक की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था का केंद्र बताया।

कला और अर्थव्यवस्था का खुला मंच

पैमाना अभूतपूर्व है। पाँच दिनों का यह आयोजन पूरे राज्य को एक विशाल अस्थायी कला-दीर्घा में बदल देता है, जिससे लगभग ₹32,000 करोड़ का व्यापार उत्पन्न होता है। यह धनराशि पश्चिम बंगाल के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का करीब 2.5% है। वस्तुतः यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है; यह भारत का सबसे बड़ा विकेंद्रीकृत सार्वजनिक कला-उत्सव है, जिसे दिसंबर 2021 में यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया था।

मुख्य सांख्यिकी एवं विवरण तालिका

प्रमुख संस्थागत और वित्तीय आंकड़े
प्रमुख आयामप्रामाणिक तथ्य / आंकड़े
नियामक संस्थायूनेस्को (2003 अभिसमय) एवं संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार
वित्तीय आकार₹32,000 करोड़ से अधिक (पश्चिम बंगाल के GSDP का लगभग 2.5%)
यूनेस्को सूची वर्षदिसंबर 2021 (अमूर्त सांस्कृतिक विरासत समिति का 16वां सत्र)
संवैधानिक आधारभाग IV-A: अनुच्छेद 51A(f) (सामासिक संस्कृति) एवं 51A(e) (स्त्री सम्मान)
मुख्य कार्यबलकुमारटुली के मूर्तिकार, चंदननगर के प्रकाश तकनीशियन, ढाकी (वादक) और पंडाल शिल्पी

दुर्गा पूजा के तीन आधार स्तंभ

  1. संवैधानिक आधार: नागरिक कर्तव्य और सामाजिक चेतना

    राष्ट्रपति मुर्मु का वक्तव्य आस्था को सीधे संवैधानिक उत्तरदायित्व से जोड़ता है। दैवीय शक्ति की आराधना अनुच्छेद 51A(e) के उस निर्देश का प्रत्यक्ष पालन है, जो महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाली रूढ़ियों के बहिष्कार की मांग करता है। साथ ही, सर्वसमावेशी भागीदारी अनुच्छेद 51A(f) के तहत सामासिक संस्कृति की सुरक्षा करती है। यहाँ कर्तव्य किताबों तक सीमित नहीं रहते; समाज उन्हें स्वाभाविक आचरण बना लेता है।

  2. रचनात्मक अर्थव्यवस्था: असंगठित श्रम को सीधी पूँजी

    पूँजी का प्रवाह सीधा है। दुर्गा पूजा एक आत्मनिर्भर रचनात्मक उद्योग की तरह संचालित होती है। यह तंत्र औपचारिक निगमित ढाँचों से बाहर धन का संचरण करता है: कुमारटुली के मृत्तिका शिल्पी, बाँस-वस्त्र के कारीगर, चंदननगर के विद्युत सज्जाकार और ग्रामीण ढाकी बिना किसी मध्यस्थ के पारिश्रमिक प्राप्त करते हैं। व्यावहारिक धरातल पर, यह उत्सव बिना किसी भारी राजकोषीय सहायता के अनौपचारिक श्रम बल को आजीविका देता है।

  3. बहुपक्षीय मान्यता: 2003 का यूनेस्को तंत्र

    ऐतिहासिक रूप से संरक्षण नीतियां केवल स्थायी पत्थरों और स्मारकों तक केंद्रित थीं। दिसंबर 2021 में यूनेस्को ने दुर्गा पूजा को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत घोषित किया, जिससे यह इस सूची में आने वाला एशिया का पहला सार्वजनिक उत्सव बना। यह दर्जा लुप्तप्राय हस्तशिल्प विधाओं को सुरक्षा देता है, संतुलित सांस्कृतिक पर्यटन बढ़ाता है और पारंपरिक कला को औपचारिक वैश्विक मंच पर स्थापित करता है।

सार संक्षेप

दुर्गा पूजा नागरिक कर्तव्य, लोक कला और आर्थिक उत्पादकता का संगम है। नारी गरिमा और सामाजिक सद्भाव को ₹32,000 करोड़ की अर्थव्यवस्था से जोड़कर यह आयोजन प्रमाणित करता है कि सांस्कृतिक संरक्षण संग्रहालयों की वस्तु नहीं है। यह ज़मीन पर धड़कने वाला एक व्यावहारिक आर्थिक संवाहक और संवैधानिक चेतना का माध्यम है।

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Q1 UNESCO अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) फ्रेमवर्क और भारत में इसकी मान्यता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 2003 का UNESCO कन्वेंशन मुख्य रूप से जीवित परंपराओं और मौखिक अभिव्यक्तियों के बजाय भौतिक स्थापत्य स्मारकों और पुरातात्विक खंडहरों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करता है। 2. दुर्गा पूजा को दिसंबर 2021 में अपने 16वें सत्र के दौरान मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की UNESCO की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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Q2 भारत के संविधान के संदर्भ में, मौलिक कर्तव्यों (भाग IV-A) के कौन से विशिष्ट प्रावधान महिलाओं की गरिमा (नारी शक्ति) को बनाए रखने और समग्र सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने वाली प्रथाओं द्वारा संचालित होते हैं?

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Q3 दुर्गा पूजा जैसे विकेंद्रीकृत जन सांस्कृतिक उत्सवों द्वारा उदाहरण स्वरूप 'क्रिएटिव इकोनॉमी' या 'ऑरेंज इकोनॉमी' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह एक ऐसे आर्थिक ढांचे का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ मौद्रिक मूल्य भारी औद्योगिक विनिर्माण के बजाय सांस्कृतिक, बौद्धिक और डिज़ाइन-आधारित उत्पादन से सीधे प्राप्त होता है। 2. ऐसे पारिस्थितिक तंत्र मुख्य रूप से संस्थागत राज्य सब्सिडी पर निर्भर करते हैं, जो पूरी तरह से अनौपचारिक स्थानीय श्रम बाजारों के बाहर काम करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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