परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रमुख विषय एवं अवधारणाएं
- वैश्विक नवाचार सूचकांक (GII): विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा संकलित वार्षिक अध्ययन, जो लगभग 80 संकेतकों के माध्यम से राष्ट्रीय वैज्ञानिक क्षमता, विनियामक ढांचे, अवसंरचना और शोध आउटपुट को मापता है।
- संविधान का अनुच्छेद 51A(h): प्रत्येक नागरिक पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और सुधार की भावना विकसित करने का दायित्व सौंपने वाला मूल कर्तव्य, जो राज्य के वैज्ञानिक कार्यक्रमों का वैधानिक आधार है।
- राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति: भारतीय पेटेंट कार्यालयों के आधुनिकीकरण, ट्रेडमार्क निस्तारण में तेजी और स्वदेशी आविष्कारों के व्यावसायीकरण को गति देने वाला प्रमुख नीतिगत दस्तावेज।
कल का प्रमुख घटनाक्रम: विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) ने वैश्विक नवाचार सूचकांक 2026 की तालिका जारी की, जिसमें भारत ने 38वां स्थान हासिल किया है। यह बढ़त सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के निर्यात, प्रारंभिक उद्यम पूंजी प्रवाह और पेटेंट आवेदन प्रक्रियाओं के सुदृढ़ीकरण से दर्ज हुई।
प्रयोगशालाओं से वैश्विक बाजार तक की यात्रा
यह प्रगति स्वतः नहीं हुई। वर्ष 2015 में भारत इस सूची में 81वें पायदान पर था; 2026 तक पहुंचते-पहुंचते देश ने 38वां स्थान हासिल कर लिया।
किसी देश की शोध प्रणाली को बिजली पारेषण तंत्र के समान देखा जा सकता है। एक दशक पहले तक भारत का बौद्धिक ढांचा कमजोर तारों, विनियामक रुकावटों और अत्यधिक लालफीताशाही से ग्रस्त था। विचार प्रयोगशालाओं में उपजते तो थे, किंतु पेटेंट मिलने से पहले ही दम तोड़ देते थे। नीतिगत फेरबदल ने इस परिदृश्य को बदला। पेटेंट जांच की समयावधि घटी; डिजिटल फाइलिंग अनिवार्य हुई; और विश्वविद्यालय स्तरीय अनुसंधानों को सीधे वित्तीय पूंजी से जोड़ा गया।
महत्वपूर्ण डेटा सारणी
| मूल्यांकन आयाम | संबंधित तथ्य / मीट्रिक |
|---|---|
| जारीकर्ता संस्था | विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO), जिनेवा |
| समीक्षित अर्थव्यवस्थाएं | 130 से अधिक देश, लगभग 80 विस्तृत संकेतक |
| रैंकिंग की दिशा | 81वां स्थान (2015) → 40वां स्थान (2023) → 38वां स्थान (2026) |
| प्रमुख प्रेरक घटक | सॉफ्टवेयर निर्यात, उद्यम पूंजी सौदे, घरेलू बाजार का आकार |
सुधार के तीन आधार स्तंभ
- प्रशासनिक सरलीकरण और विनियामक गति: पुराने कानूनों को हटाने और प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने से भारत वैश्विक संरचनात्मक सुधारों में 57वें स्थान पर पहुंचा। राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा नीति के तहत शैक्षणिक संस्थानों के आवेदनों को प्राथमिकता दी गई, जिससे निजी क्षेत्र के लिए शोध में पूंजी लगाना अधिक सुरक्षित हुआ।
- उद्यम पूंजी और ज्ञान का निर्यात: आईसीटी सेवा निर्यात के मामले में भारत शीर्ष देशों में बना हुआ है। अटल इनोवेशन मिशन के जरिए स्थापित इनक्यूबेशन केंद्रों ने तकनीकी कॉलेजों को सीधे औद्योगिक पूंजी से जोड़ा। शोध पत्र अब केवल पुस्तकालयों में बंद नहीं रहते, बल्कि वाणिज्यिक रूप ले रहे हैं।
- संस्थागत विषमता और सामरिक स्थिति: आंकड़े एक विषम यथार्थ भी दिखाते हैं। सामरिक मोर्चे पर भारत ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स में चौथे स्थान पर काबिज है, जो उसकी सैन्य शक्ति को दर्शाता है। इसके विपरीत, नागरिक प्रशासन और पारदर्शिता में चुनौतियां बनी हुई हैं; ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक में देश 180 राष्ट्रों में 96वें स्थान पर दर्ज है।
निष्कर्ष एवं भावी राह
शीर्ष 40 देशों में उपस्थिति यह दर्शाती है कि डिजिटल ढांचे और पेटेंट सरलीकरण के नीतिगत कदम सही दिशा में हैं। संविधान के अनुच्छेद 51A(h) में वर्णित वैज्ञानिक सोच को आर्थिक व्यवहार्यता में बदलना आवश्यक था। आगे की चुनौती यह होगी कि तकनीकी दक्षता (38वां स्थान) और प्रशासनिक पारदर्शिता (96वां स्थान) के बीच संतुलन साधा जाए। संस्थागत जवाबदेही सुधरे बिना तकनीकी विकास का लाभ आम नागरिक तक पहुंचाना संभव नहीं होगा।