परीक्षा के मुख्य विषय एवं अवधारणाएं
- आर्थिक भूगोल (Economic Geography): भौतिक परिदृश्य पर उत्पादन, व्यापार और संसाधन वितरण का स्थानिक अध्ययन। (परीक्षा उपयोगिता: UPSC GS पेपर 1 एवं 3, राज्य PSC)
- समूहन की अर्थव्यवस्थाएं (Agglomeration Economies): विशिष्ट क्षेत्रों में औद्योगिक समूहों की उपस्थिति से कंपनियों को प्राप्त होने वाली लागत बचत। (परीक्षा उपयोगिता: औद्योगिक अवस्थिति सिद्धांत)
- वैधानिक स्थानिक दिशानिर्देश (Statutory Spatial Guidelines): क्षेत्रीय भूमि उपयोग और पूंजी निवेश को नियंत्रित करने वाले कानूनी नियम। (परीक्षा उपयोगिता: भारतीय शासन एवं आर्थिक नियोजन)
27 अक्टूबर 2026 का घटनाक्रम
27 अक्टूबर 2026 को भारत सरकार ने देश भर में आर्थिक भूगोल से जुड़े अद्यतन वैधानिक नियमों को अधिसूचित किया। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय तथा नीति आयोग द्वारा तैयार यह ढांचा भूमि नियोजन, लॉजिस्टिक्स एकीकरण और प्रादेशिक संसाधन आवंटन को विनियमित करता है।
औद्योगिक पूंजी का स्थानिक तर्क
पूंजी योजनाबद्ध तरीके से चलती है। सेमीकंडक्टर कारखाने विशिष्ट तकनीकी क्षेत्रों में केंद्रित होते हैं; बड़े माल ढुलाई डिपो ठीक वहीं बनते हैं जहाँ मुख्य रेल मार्ग समुद्री बंदरगाहों से जुड़ते हैं। भूगोल केवल नदियों और पर्वतों का ढांचा नहीं है। यह राष्ट्रीय आर्थिक वृद्धि का सक्रिय संचालक है।
जब कोई कंपनी नया कारखाना लगाती है, तो उसे दूरी की लागत चुकानी पड़ती है। परिवहन में देरी, बिजली हानि और माल भाड़ा मिलकर स्थानिक घर्षण पैदा करते हैं। यदि इसे केवल बाजार के भरोसे छोड़ दिया जाए, तो निवेश पुराने बड़े शहरों में ही जमा होता जाता है। इससे शुरुआत में दक्षता तो मिलती है, लेकिन बाद में जमीन के दाम बहुत बढ़ जाते हैं और शहरों पर भारी दबाव पड़ता है।
27 अक्टूबर 2026 के दिशानिर्देश इसी असंतुलन को दूर करते हैं। ऐतिहासिक रूप से, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 13 से 14 प्रतिशत हिस्सा लॉजिस्टिक्स पर खर्च होता रहा है। व्यावहारिक धरातल पर, औद्योगिक क्षेत्रों को सीधे माल गलियारों से जोड़ने से माल ढुलाई समय और लागत दोनों घटते हैं।
2026 के नियमों के प्रमुख उद्देश्य
नया ढांचा दो मुख्य प्राथमिकताओं के आधार पर भूमि उपयोग को व्यवस्थित करता है:
| उद्देश्य | कार्यान्वयन रणनीति | आर्थिक प्रभाव |
|---|---|---|
| लागत नियंत्रण | औद्योगिक पार्कों को सीधे समर्पित फ्रेट कॉरिडोर से जोड़ना। | लॉजिस्टिक्स खर्च को वैश्विक स्तर (~8% GDP) तक लाना। |
| क्षेत्रीय संतुलन | टायर-2 और टायर-3 शहरों में औद्योगिक परिसरों का निर्माण। | महानगरों पर दबाव कम करना और दूरदराज के क्षेत्रों का विकास। |
आगे की राह: अगली कार्ययोजना
प्रशासनिक निकायों के समक्ष तीन मुख्य कार्य हैं:
- राज्य नीतियों में बदलाव: राज्य सरकारों को अपने औद्योगिक भूमि नियमों को केंद्रीय वैधानिक नियमों के अनुकूल बनाना होगा।
- डिजिटल जीआईएस मैपिंग: औद्योगिक क्षेत्रों को पीएम गति शक्ति जीआईएस प्लेटफॉर्म पर डाला जाएगा ताकि निवेशक वास्तविक समय में जमीन की स्थिति देख सकें।
- समीक्षा ऑडिट: माल परिवहन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अंतर-मंत्रालयी समितियां हर तीन महीने में समीक्षा करेंगी।