Banking System & Structure 📅 03 November 2026 ✍️ Dr. Arvind Swaminathan

भारत की बैंकिंग प्रणाली और सहकारी ढांचे की रूपरेखा

भारत की बैंकिंग प्रणाली और सहकारी ढांचे की रूपरेखा

भारत की बैंकिंग प्रणाली और सहकारी ढांचे की रूपरेखा

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण विषय एवं अवधारणाएँ:
  • बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949: यह भारत में बैंकिंग संचालन और विवेकपूर्ण मानदंडों को तय करने वाला प्राथमिक विधायी आधार है।
  • दोहरी विनियमन प्रणाली: यह प्रशासनिक तंत्र है जहाँ भारतीय रिजर्व बैंक बैंकिंग कार्यों का प्रबंधन करता है, जबकि सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार पंजीकरण संभालते हैं।

कल की महत्वपूर्ण घटना: 17 अक्टूबर, 2025 को जारी एक विस्तृत विश्लेषण में बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 और राज्य सहकारी समिति अधिनियमों के तहत सहकारी बैंकों की बहु-स्तरीय रूपरेखा को रेखांकित किया गया था।

कल्पना कीजिए कि पानी की एक विशाल सिंचाई नहर प्रणाली किसी देश के दूरदराज के खेतों तक पानी पहुँचाने के लिए बनाई गई है। इसके उद्गम स्थल पर विशाल जलाशय हैं। दशकों से, भारत का ग्रामीण सहकारी ऋण ढांचा बिल्कुल इसी महत्वपूर्ण नेटवर्क की तरह काम कर रहा है। फिर भी, जब एक संरचित शासन समीक्षा प्रकाशित हुई, तो इसने पूरे वित्तीय परिदृश्य में हलचल पैदा कर दी।

क्षेत्रीय प्रभाव का विश्लेषण

  • तत्काल क्षेत्रीय प्रभाव: जमीनी स्तर पर, प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ अपनी ऋण पारदर्शिता को लेकर जांच के दायरे में आ गईं। मध्यवर्ती केंद्रीय बैंकों और शीर्ष राज्य सहकारी बैंकों ने कड़े विवेकपूर्ण मानदंडों के साथ स्थानीय ऋण प्रथाओं को संरेखित करने का दबाव महसूस किया।
  • आर्थिक एवं नागरिक प्रभाव: लाखों ग्रामीण जमाकर्ताओं के लिए, इस प्रशासनिक समीक्षा का अर्थ बढ़ी हुई वित्तीय सुरक्षा है। भारतीय रिजर्व बैंक और राज्य सहकारी समिति रजिस्ट्रार के बीच दोहरी देखरेख को स्पष्ट करके, यह ढांचा तरलता संकट के जोखिम को कम करता है।
  • दीर्घकालिक रणनीतिक प्रभाव: अगले दशक में, यह प्रशासनिक स्पष्टता भारत को अपनी असंगठित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को औपचारिक वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में एकीकृत करने में सक्षम बनाएगी।
आवश्यक शब्दावली एवं परिभाषाएँ:

सहकारी बैंक: बिना लाभ, बिना हानि के सहकारी सिद्धांत पर गठित वित्तीय इकाइयाँ, जो ग्रामीण क्षेत्रों में तीन स्तरों और शहरी क्षेत्रों में एकल-स्तरीय संरचना पर काम करती हैं।

दोहरी विनियमन प्रणाली: अनूठी शासन प्रणाली जहाँ बैंकिंग संचालन केंद्रीय बैंकिंग प्राधिकरण द्वारा देखा जाता है, जबकि प्रशासनिक मामले और ऑडिट सहकारी समिति अधिनियमों के अंतर्गत आते हैं।

भविष्य का रोडमैप मैट्रिक्स

लक्ष्य मील का पत्थर तिथिअपेक्षित शासन मीट्रिकप्रमुख समीक्षा जाँच बिंदु
सभी तीन ग्रामीण स्तरों पर ऑडिट मानकों का सामंजस्यभारतीय रिजर्व बैंक ऑडिट अनुपालन फाइलिंग
प्राथमिक कृषि ऋण समितियों का डिजिटल एकीकरणनाबार्ड और राज्य सहकारी बैंक प्रगति मूल्यांकन
दो साल की समीक्षा के बाद वैधानिक स्वास्थ्य ऑडिटबैंकिंग विनियमन अधिनियम के कार्यान्वयन की संसदीय समिति समीक्षा

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Q1 भारत में सहकारी बैंकों के विनियामक ढांचे के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सहकारी बैंकों के बैंकिंग संचालन, विवेकपूर्ण मानदंडों और वैधानिक लाइसेंसिंग को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत विशेष रूप से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियंत्रित किया जाता है। 2. सहकारी समितियों का समामेलन, पंजीकरण, प्रबंधन और प्रशासनिक ऑडिट राज्य या केंद्रीय सहकारी समिति अधिनियमों के क्षेत्राधिकार में आते हैं जिनका संचालन रजिस्ट्रार द्वारा किया जाता है। दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

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