🎯 Question #71Biology 📅 13 October 2026

जैव सुरक्षा स्तर (BSL) और जैव सुरक्षा विनियामक ढाँचों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. BSL-1 रोकथाम मानक कम जोखिम वाले, अच्छी तरह से चिह्नित रोगाणुओं पर लागू होते हैं जो स्वस्थ वयस्क मनुष्यों में लगातार बीमारी पैदा करने के लिए नहीं जाने जाते हैं। 2. चिंता का दोहरे उपयोग वाला अनुसंधान (DURC) विशेष रूप से उन जैविक अध्ययनों को संदर्भित करता है जिन्हें बिना किसी शैक्षणिक अनुसंधान अपवाद के अंतरराष्ट्रीय कानून द्वारा पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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This question was curated from today's in-depth analytical breakdown: भारत का नया जैव-सुरक्षा और पुनर्योगज डीएनए ढांचा

कल का घटनाक्रम: नीतिगत उत्प्रेरक

13 अक्टूबर 2026 को भारत सरकार ने 'सामान्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी' के तहत जीव विज्ञान के क्षेत्र में एकीकृत वैधानिक अद्यतनों और संशोधित नियामक दिशानिर्देशों को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया। इसके तहत जैविक अनुसंधान, आनुवंशिक परीक्षण और जैव-विनिर्माण के लिए बाध्यकारी अनुपालन तंत्र स्थापित किया गया है।


प्रयोगशाला से राजपत्र तक

सेंट्रीफ्यूज की तेज आवाज थमती है। जीनोम-अनुक्रमण प्रयोगशाला में कार्यरत शोधकर्ता अपनी जांच रोककर नए राजपत्र का अध्ययन करते हैं। 13 अक्टूबर 2026 को भारत ने जीवन विज्ञान क्षेत्र के लिए एक नई विनियामक व्यवस्था लागू की।

यह सुधार हवाई यातायात नियंत्रण प्रणाली के आधुनिकीकरण के समान है। अब तक भारतीय वैज्ञानिकों को कई मंत्रालयों के अलग-अलग नियमों से जूझना पड़ता था; इससे शोध कार्यों में अनावश्यक विलंब होता था। नए ढांचे के अंतर्गत प्रत्येक संशोधित जीन संरचना, जैव-नियंत्रण इकाई और नैदानिक संवर्धन को एक ही विनियामक छत के नीचे लाया गया है। इसका उद्देश्य स्पष्ट है: अनुसंधान में गति और जैविक जोखिमों पर पूर्ण नियंत्रण।

क्षेत्रवार प्रभाव का विश्लेषण

संस्थागत अनुसंधान: समयसीमा की बाध्यता
नए नियम शैक्षणिक और औद्योगिक प्रयोगशालाओं के लिए एकल-खिड़की व्यवस्था अनिवार्य करते हैं। बायो-सेफ्टी लेवल 2 (BSL-2) से लेकर BSL-4 स्तर की इकाइयों को स्पष्ट मानक दिए गए हैं; आनुवंशिक संवर्धन की मंजूरी की समयसीमा 180 दिनों से घटाकर अधिकतम 45 दिन कर दी गई है।
आर्थिक प्रभाव: सस्ती औषधियां और रोजगार
स्पष्ट नियमों से निजी निवेश का जोखिम घटा है। क्लिनिकल सत्यापन की लागत 15% से 20% तक घटने का अनुमान है; इसका सीधा असर इंसुलिन और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज जैसी आवश्यक दवाओं की खुदरा कीमतों पर पड़ेगा। जमीनी स्तर पर, बायोप्रोसेसिंग और विनियामक ऑडिट में लगभग 50,000 प्रशिक्षित तकनीशियनों की आवश्यकता होगी।
रणनीतिक सुरक्षा: वैश्विक मानकों से जुड़ाव
दीर्घकालिक दृष्टि से, ये मानक ओईसीडी की प्रयोगशाला कार्यप्रणाली के अनुरूप हैं। यह व्यवस्था देश को रोगाणुओं के आकस्मिक प्रसार से बचाती है; साथ ही बाहरी आपूर्ति बाधाओं की स्थिति में जैविक कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करती है।

कार्यान्वयन रूपरेखा तालिका

लक्षित तिथिअपेक्षित वैधानिक लक्ष्यसमीक्षा प्राधिकरण
31 मार्च 2027केंद्रीय डिजिटल पोर्टल पर सभी सार्वजनिक व निजी प्रयोगशालाओं का अनिवार्य पंजीकरण; 1,200 केंद्रों का निरीक्षण।राष्ट्रीय जैव-सुरक्षा अनुपालन रजिस्ट्री
15 दिसंबर 2027पांच क्षेत्रीय निरीक्षण केंद्रों की शुरुआत; 300 नए नैदानिक जैविक विनिर्माण संयंत्रों को वैधानिक संचालन प्रमाणन।अंतर-मंत्रालयी जैव-प्रौद्योगिकी समीक्षा समिति
13 अक्टूबर 2029त्रि-वार्षिक विनियामक समीक्षा; $150 अरब की जैव-अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के लिए सिंथेटिक बायोलॉजी नियमों का एकीकरण।विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी वैधानिक निगरानी परिषद

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