🎯 Question #76Environmental Issues & Conventions 📅 14 October 2026

आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) और रामसर कन्वेंशन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रामसर कन्वेंशन 1971 में हस्ताक्षरित एक अंतरसरकारी संधि है जो आर्द्रभूमि संरक्षण पर राष्ट्रीय कार्रवाई और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए रूपरेखा प्रदान करती है। 2. आर्द्रभूमि जैविक इकोटोन के रूप में कार्य करती हैं जो विषाक्त पदार्थों को फ़िल्टर करती हैं, अतिरिक्त सतही अपवाह को अवशोषित करती हैं, और जलभृतों (ऐफिफ़र) को फिर से भरने में मदद करती हैं। 3. भारत के नामित रामसर स्थलों का नेटवर्क प्रवासी जलपक्षियों के लिए मध्य एशियाई फ्लाईवे के साथ महत्वपूर्ण विश्राम स्थल के रूप में कार्य करता है। उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

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This question was curated from today's in-depth analytical breakdown: भारत का आर्द्रभूमि ग्रिड और बाघ गलियारा

भारत का आर्द्रभूमि ग्रिड और बाघ गलियारा: पारिस्थितिक संतुलन एवं जलवायु प्रतिबद्धताएं

प्रमुख परीक्षा उपयोगी अवधारणाएं एवं तथ्य संक्षेप

  • रामसर अभिसमय एवं आर्द्रभूमि नेटवर्क: वर्ष 1971 में हस्ताक्षरित यह अंतर-सरकारी संधि आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके विवेकपूर्ण उपयोग का ढांचा तय करती है। ये क्षेत्र किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र के जैविक गुर्दे कहलाते हैं; ये प्रदूषक तत्वों को छानते हैं, अतिरिक्त मानसूनी जल संचित करते हैं और भूजल स्तर को स्थिर रखते हैं।
  • जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता: सकल घरेलू उत्पाद की प्रति इकाई पर पैदा होने वाली ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा। इस अनुपात को घटाकर देश औद्योगिक उत्पादन को कार्बन वृद्धि से अलग करता है।
  • संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 48क एवं 51क(छ)): भारत की दोहरी विधिक व्यवस्था। अनुच्छेद 48क राज्य को वनों और वन्यजीवों की रक्षा का दायित्व देता है; दूसरी ओर अनुच्छेद 51क(छ) प्रत्येक नागरिक के लिए प्राकृतिक पर्यावरण संरक्षण को अनिवार्य कर्तव्य घोषित करता है।
  • अखिल भारतीय बाघ आकलन: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा प्रत्येक चार वर्ष पर आयोजित की जाने वाली वैज्ञानिक कैमरा-ट्रैप गणना, जो शीर्ष शिकारियों की वास्तविक संख्या प्रमाणित करती है।

कल की प्रमुख घटना

को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की। इस विचार-विमर्श में 85 रामसर स्थलों और 3,167 जंगली बाघों के संरक्षण तंत्र को वर्ष 2030 के उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों के साथ धरातल पर जोड़ने की रणनीति बनी।

सार-संक्षेप परिदृश्य

वन्यजीव प्रबंधन कठोर आंकड़ों पर टिका है। भारत 1.4 अरब आबादी के बीच दुनिया के 75 प्रतिशत जंगली बाघों को संभाल रहा है। इसके साथ ही, देश ने 13.5 लाख हेक्टेयर से अधिक जलीय क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय संरक्षण सूची में पंजीकृत कराया है। वन अधिकारी अब केवल पेड़ों के रक्षक नहीं हैं; वे अब कार्बन सोखने वाली प्रणालियों के वैज्ञानिक नियामक बन चुके हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य एवं आंकड़े

संरक्षण और वैधानिक मानकों का तुलनात्मक विवरण
प्रमुख आयामप्रमाणित आंकड़े / विधिक प्राधिकरण
नियामक प्राधिकरणपर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)
संरक्षित आर्द्रभूमि क्षेत्र85 निर्दिष्ट रामसर स्थल, 13.5 लाख हेक्टेयर से अधिक (दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा तंत्र)
शीर्ष शिकारी संख्यान्यूनतम 3,167 बाघ (5वां अखिल भारतीय बाघ आकलन; दुनिया की कुल जंगली आबादी का ~75%)
अद्यतित एनडीसी लक्ष्य2005 के स्तर की तुलना में 2030 तक जीडीपी उत्सर्जन तीव्रता में 45% कटौती; 50% गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता
वैधानिक ढांचावन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023
संवैधानिक आधारनीति निदेशक तत्व अनुच्छेद 48क (राज्य का कर्तव्य); मूल कर्तव्य अनुच्छेद 51क(छ) (नागरिकों का दायित्व)

संरक्षण के तीन आधार स्तंभ

1. जल-पारिस्थितिक सुरक्षा: रामसर ग्रिड का विस्तार

आर्द्रभूमियां सामान्य तालाब नहीं हैं। पारिस्थितिकी विज्ञान के अनुसार ये 'इकोटोन' अथवा संक्रमणकालीन दलदली क्षेत्र हैं। भारत के 85 रामसर स्थल प्राकृतिक तटबंध का काम करते हैं। जब भारी वर्षा होती है, ये स्थल लाखों गैलन पानी सोख लेते हैं; ग्रीष्मकाल में यही संचित जल भूजल स्तर को सूखने से बचाता है। मध्य एशियाई उड़ान मार्ग से गुजरने वाले हजारों प्रवासी पक्षियों के लिए ये सुरक्षित पड़ाव हैं। धरातल पर मुख्य संकट यह है कि शहरी सीवेज और रासायनिक अपशिष्ट लगातार इन प्राकृतिक जलमार्गों को अवरुद्ध कर रहे हैं।

2. शीर्ष शिकारी आबादी: गलियारा प्रबंधन और क्षेत्रीय संघर्ष

बाघ एकांतप्रिय और क्षेत्रीय प्राणी है। एक पूर्ण वयस्क बाघ को नियमित शिकार के लिए 20 से 100 वर्ग किलोमीटर के अबाध वन क्षेत्र की दरकार होती है। कोर जंगलों में घनत्व बढ़ने के कारण बाघ बफर क्षेत्रों और मानव बस्तियों की सीमाओं में प्रवेश कर रहे हैं।

  • वन प्रभाग प्राकृतिक वन्यजीव गलियारों को जोड़कर आनुवंशिक पृथक्करण को रोक रहे हैं।
  • संवेदनशील सीमाओं पर कैमरा सेंसर और रियल-टाइम निगरानी प्रणाली स्थापित की जा रही है।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की सख्त धाराओं के तहत अवैध शिकार पर अंकुश लगाया जा रहा है।

अखंड गलियारों के अभाव में अलग-थलग पड़े बाघों में प्रजनन ह्रास का खतरा गहरा जाता है। मानव और वन्यजीव के बीच संतुलन बनाए रखना निरंतर जटिल होता जा रहा है।

3. डीकार्बोनाइजेशन गणना: संशोधित एनडीसी प्रतिबद्धताएं

वन सुरक्षा का सीधा संबंध अंतरराष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों से है। अपने संशोधित एनडीसी के अंतर्गत भारत ने 2030 तक अपनी अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत कम करने का संकल्प लिया है। भारी उद्योग, इस्पात और सीमेंट कारखानों के अनियंत्रित धुएं को सोखने के लिए घने प्राकृतिक वनों की आवश्यकता अनिवार्य है। वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023 के तहत हरित आवरण का संवर्धन अनुच्छेद 48क के संवैधानिक आदेश को पूरा करता है, जो स्थानीय वनीकरण को वैश्विक समझौतों से मजबूती से जोड़ता है।

रणनीतिक निष्कर्ष

विकास और जैव विविधता साथ चल सकते हैं। देश में 85 रामसर स्थलों का संरक्षण और 3,167 बाघों की मौजूदगी दर्शाती है कि औद्योगिकीकरण के बीच प्राकृतिक आवास सुरक्षित रखे जा सकते हैं। आगे की राह स्पष्ट है: अधिकारियों को सीमावर्ती बस्तियों में टकराव न्यूनतम रखते हुए प्राकृतिक कार्बन सोखने वाले वनों को हर हाल में बचाना होगा।

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