🎯 Question #97Digital Economy & Tech Policies 📅 17 October 2026

भारत की रणनीतिक औद्योगिक नीतियों और संवैधानिक ढांचे के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत के संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) संवैधानिक आधार के रूप में कार्य करते हैं जो राज्य की नीति को धन और भौतिक संसाधनों के संकेंद्रण को रोकने की दिशा में निर्देशित करते हैं। 2. इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) एक नोडल पहल है जो वाणिज्यिक निर्माण संयंत्रों के निर्माण के लिए 75% तक राजकोषीय पूंजी सहायता प्रदान करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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This question was curated from today's in-depth analytical breakdown: भारत की तकनीकी संप्रभुता: सिलिकॉन, डेटा और विनिर्माण

तकनीकी पराधीनता का अंत: भारत का संप्रभु सिलिकॉन और डेटा सुरक्षा अभियान

कल की घटना: नीतिगत समीक्षा का संदेश

को जारी वाणिज्यिक समीक्षा रिपोर्टों ने स्पष्ट किया कि भारत घरेलू विनिर्माण को गति देकर संप्रभु डिजिटल तंत्र तैयार कर रहा है; यह संरचना अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं के विखंडन से घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत सुरक्षा प्रदान करती है।

रणनीतिक परिदृश्य: तकनीकी पराधीनता के चक्रव्यूह को तोड़ना

वैश्विक अर्थव्यवस्था अब खुली नहीं रही। दशकों का अनियंत्रित वैश्वीकरण पीछे छूट रहा है; कभी पश्चिमी देशों में चिप का डिजाइन बनता था, ताइवान में वेफर तैयार होते थे, और भारत केवल उपभोक्ता बाजार था। आज स्थिति बदल चुकी है। विकसित देशों ने आधुनिक लिथोग्राफी मशीनों पर कड़े निर्यात प्रतिबंध लगा दिए हैं; खनिज आपूर्तिकर्ताओं ने कच्चे माल पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है।

तकनीकी संप्रभुता के बिना केवल उपभोक्ता बने रहना बेहद घातक है। यदि विदेशी आपूर्ति रुक जाए, तो घरेलू बैंकिंग सर्वर, संचार माध्यम और परिवहन नेटवर्क कुछ ही घंटों में ठप हो सकते हैं।

भारत ने इस खतरे को पहचाना। देश अब केवल सॉफ्टवेयर सेवाएं देने वाला देश नहीं रहा, बल्कि अपनी औद्योगिक नीति खुद तैयार कर रहा है। संविधान के अनुच्छेद 39(ख) और 39(ग) का स्पष्ट निर्देश है कि उत्पादन के साधनों और आवश्यक संसाधनों का संकेंद्रण कुछ हाथों में न हो।

भारत के तकनीकी संप्रभुता स्तंभ
नीतिगत पहलवित्तीय व वैधानिक दायरारणनीतिक उद्देश्य
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन₹76,000 करोड़ का बजटघरेलू सिलिकॉन फैब्स, पैकेजिंग और परीक्षण संयंत्र।
पीएलआई (PLI) योजनाएँ14 प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र₹12.5 लाख करोड़ से अधिक का उत्पादन; मोबाइल निर्यातक बनना।
डीपीडीपी अधिनियम, 2023विधिक डेटा अभिशासनसीमा-पार डेटा संचरण पर विनियामक नियंत्रण और नागरिक सुरक्षा।

आंकड़े इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत ₹76,000 करोड़ का सार्वजनिक कोष सीधे संयंत्र निर्माण में लगाया जा रहा है। साथ ही, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं ने ₹12.5 लाख करोड़ से अधिक का विनिर्माण उत्पादन दर्ज किया है। नतीजतन, भारत दूरसंचार और मोबाइल उपकरणों के शुद्ध आयातक से बदलकर एक बड़ा निर्यातक बन चुका है।

"इक्कीसवीं सदी में रणनीतिक स्वायत्तता केवल सीमाओं की सुरक्षा से तय नहीं होती; यह हमारे सर्वरों में लगे घरेलू सिलिकॉन और डेटा प्रवाह को सुरक्षित रखने वाले कानूनों पर निर्भर करती है।"

किराये की डिजिटल व्यवस्था अब अस्वीकार्य है। दशकों तक भारत ने विदेशी हार्डवेयर और सुदूर स्थित विदेशी क्लाउड सर्वरों पर भरोसा किया। यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते विदेशी प्रदाता सेवाएं बंद कर दें, तो पूरा घरेलू तंत्र लड़खड़ा जाता। वर्तमान नीतियां इसी जोखिम को समाप्त करती हैं। भारत अब अपनी जमीन पर डेटा सेंटर बना रहा है, अपने ऑप्टिकल फाइबर बिछा रहा है और अपने माइक्रोप्रोसेसर तैयार कर रहा है।

जन-सरोकार: विद्यार्थियों, पेशेवरों और नागरिकों पर प्रभाव

यह औद्योगिक बदलाव केवल नीतिगत गलियारों तक सीमित नहीं है; इसका सीधा प्रभाव समाज के प्रत्येक वर्ग पर पड़ता है।

विद्यार्थियों एवं परीक्षार्थियों के लिए

  • पाठ्यक्रम प्रासंगिकता: संघ लोक सेवा आयोग और राज्य सिविल सेवा परीक्षाओं के सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्रों (अर्थव्यवस्था एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी) से सीधा संबंध। अनुच्छेद 39(ख) के संवैधानिक लक्ष्यों और पीएलआई योजना के पूंजीगत आवंटन के अंतर्संबंधों को समझें।
  • विश्लेषणात्मक समझ: सूचना प्रौद्योगिकी की बैक-ऑफिस सेवाओं से हटकर पूंजी-गहन हार्डवेयर विनिर्माण की ओर बढ़ते नीतिगत बदलाव का अध्ययन करें।
  • प्रमुख आंकड़े: ₹76,000 करोड़ का सेमीकंडक्टर परिव्यय, ₹12.5 लाख करोड़ का संचयी पीएलआई उत्पादन, तथा 2047 तक विकसित भारत के आर्थिक लक्ष्य।

कामकाजी पेशेवरों एवं सामान्य नागरिकों के लिए

  • डेटा सुरक्षा का अधिकार: डीपीडीपी अधिनियम, 2023 बहुराष्ट्रीय डिजिटल कंपनियों को भारतीय नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा बिना ठोस आधार के बाहर भेजने से रोकता है, जिससे अनैतिक डेटा प्रोफाइलिंग पर अंकुश लगा है।
  • रोजगार के नए अवसर: चिप डिजाइनिंग और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड निर्माण से इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन में उच्च-कौशल वाले तकनीकी रोजगार बन रहे हैं।
  • आपूर्ति की स्वतंत्रता: घरेलू विनिर्माण से अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान भी ऑटोमोबाइल, संचार नेटवर्क और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के कलपुर्जों की निर्बाध उपलब्धता बनी रहती है।

भविष्य की राह: $1 ट्रिलियन डिजिटल अर्थव्यवस्था

सॉफ्टवेयर सेवाओं का निर्यात जरूरी है, पर केवल इसी के सहारे $1 ट्रिलियन की डिजिटल अर्थव्यवस्था नहीं बनाई जा सकती। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भौतिक हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर पर पूर्ण नियंत्रण अनिवार्य है। वस्तुतः, सेमीकंडक्टर मिशन, पीएलआई योजनाओं और डीपीडीपी कानून के त्रिस्तरीय संयोजन से भारत ने अपनी आर्थिक संप्रभुता को मजबूत किया है। भविष्य के भू-राजनीतिक तूफानों से निपटने का यही सबसे ठोस माध्यम है।

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