परीक्षा उपयोगी प्रमुख तथ्य एवं संकल्पनाएँ
- 📌 सातवीं अनुसूची की संघ सूची (Union List, Seventh Schedule) की प्रविष्टि 1 व 2: यह सर्वोच्च संवैधानिक प्रावधान है जो केंद्र सरकार को देश की बाह्य सुरक्षा, सशस्त्र बलों के गठन और रणनीतिक क्षमताओं के विकास का अनन्य विधायी अधिकार प्रदान करता है।
- 📌 ब्लू-वाटर नेवी (Blue-Water Navy) एवं फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS): किसी नौसेना की वह सामरिक क्षमता जिसके माध्यम से वह सुदूर गहरे समुद्रों में अपने अभियान निरंतर जारी रख सके। यह क्षमता विशेष आपूर्ति पोतों (Replenishment Ships) के दम पर हासिल होती है।
- 📌 रक्षा स्वदेशीकरण ('आत्मनिर्भर भारत'): विदेशी आयातों पर निर्भरता कम करके घरेलू अनुसंधान, डिजाइन और सार्वजनिक-निजी विनिर्माण अनुबंधों के जरिए देश में ही हथियार व सैन्य साजो-सामान का निर्माण करना।
रक्षा समसामयिकी: गहरे समंदर में रसद का आधार 'एफएसएस सूर्य' और आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान
18 अक्टूबर 2026 का घटनाक्रम: क्या हुआ?
18 अक्टूबर 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना के नए स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS) 'सूर्य' की जलावतरण प्रक्रिया को हरी झंडी दिखाई। इसके साथ ही, घरेलू रक्षा उद्योगों को सशक्त बनाने के लिए ₹810 करोड़ से अधिक के खरीद अनुबंधों को मंजूरी दी गई। इसी दिन उत्तराखंड के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में भारतीय सेना और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के सशस्त्र बलों के बीच द्विपक्षीय युद्धाभ्यास 'माउंटेन गार्जियन 2026' (Mountain Guardian 2026) की भी औपचारिक शुरुआत हुई।
एक विचारणीय प्रश्न
कल्पना कीजिए कि आपके पास दुनिया की सबसे अत्याधुनिक और शक्तिशाली गाड़ी है, लेकिन आपको 3,000 किलोमीटर लंबे ऐसे वीरान रेगिस्तान से गुजरना है जहाँ एक भी पेट्रोल पंप या सर्विस स्टेशन नहीं है। वह गाड़ी कितनी दूर तक चल पाएगी?
जाहिर है, ईंधन और जरूरी सामान खत्म होते ही उसकी पूरी ताकत बेकार हो जाएगी।
यह कदम इतना महत्वपूर्ण क्यों है? एक विश्लेषण
गहरे समुद्र में गश्त कर रहे नौसैनिक बेड़े के सामने भी ठीक यही चुनौती होती है। एक गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक (Guided-Missile Destroyer) दुनिया के सबसे घातक हथियारों में से एक हो सकता है, लेकिन अगर अपने तटों से हजारों समुद्री मील दूर उसका ईंधन खत्म हो जाए, भोजन व ताजे पानी का भंडार खाली हो जाए या गोला-बारूद घट जाए, तो उसकी सारी मारक क्षमता धरी रह जाती है।
18 अक्टूबर 2026 को लॉन्च किया गया 'एफएसएस सूर्य' इसी रणनीतिक बाधा को समाप्त करने की दिशा में मील का पत्थर है। यह कोई साधारण जहाज नहीं, बल्कि समुद्र पर तैरता हुआ एक विशाल लॉजिस्टिक्स हब (रसद केंद्र) है। इसे विशेष रूप से गतिशील पुनर्भरण यानी 'अंडरवे रिप्लेनिश्मेंट' (Underway Replenishment - UNREP) के लिए डिजाइन किया गया है। यह पोत समुद्र में तेज गति से आगे बढ़ते हुए भी युद्धपोतों में पाइपलाइन और केबल के जरिए ईंधन, पानी और हथियार स्थानांतरित कर सकता है।
[एफएसएस सूर्य (फ्लीट सपोर्ट शिप / रसद पोत)]
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[गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक] [स्टील्थ फ्रिगेट युद्धपोत]
(अनवरत समुद्री निगरानी मिशन) (अग्रिम मोर्चा तैनाती)
सामरिक ताकत के साथ-साथ घरेलू आत्मनिर्भरता भी उतनी ही अनिवार्य है। भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) की संघ सूची के अनुच्छेद 246 के तहत प्रविष्टि 1 और 2 केंद्र सरकार को देश की रक्षा और सैन्य बलों के संप्रभु प्रबंधन का अधिकार देती हैं। इसी संवैधानिक जनादेश के तहत सरकार ने ₹810 करोड़ से अधिक की पूंजी घरेलू रक्षा उत्पादन में लगाई है। विदेशों से तैयार हथियार खरीदने के बजाय यह धनराशि भारतीय औद्योगिक गलियारों में रोजगार और तकनीक का सृजन करेगी।
इधर समुद्र में रसद का ढांचा मजबूत हुआ, तो उधर उत्तराखंड के दुर्गम उच्च-पर्वतीय क्षेत्रों में भारत-यूएई के सैनिकों ने 'माउंटेन गार्जियन 2026' अभ्यास शुरू किया। यह दर्शाता है कि एक तरफ जहाँ भारत अपनी घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर मित्र देशों के साथ आतंकवाद-रोधी और पर्वतीय युद्धकौशल में अपनी अंतर-संचालनीयता (Interoperability) को भी धार दे रहा है।
आगे की राह: अब क्या होगा?
- एफएसएस सूर्य के बंदरगाह व समुद्री परीक्षण (Harbour & Sea Acceptance Trials): औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल होने से पहले 'एफएसएस सूर्य' के तरल ट्रांसफर पंपों, स्वचालित कार्गो सिस्टम और गति का कड़े समुद्री वातावरण में गहन परीक्षण होगा।
- ₹810 करोड़ की उत्पादन लाइनों का विस्तार: घरेलू रक्षा विनिर्माण इकाइयां कड़े गुणवत्ता मानकों और स्वदेशीकरण के लक्ष्यों के साथ आवश्यक सैन्य उपकरणों का उत्पादन शुरू करेंगी।
- माउंटेन गार्जियन 2026 की सामरिक समीक्षा: उत्तराखंड के युद्धाभ्यास से मिले अनुभवों के आधार पर भारतीय सेना पश्चिम एशियाई साझेदारों के साथ अपने संयुक्त मानक संचालन प्रक्रिया (Joint SOPs) को और अधिक परिष्कृत करेगी।