🎯 Question #123Infrastructure & Landmarks 📅 19 October 2026

रसद-से-जीडीपी अनुपात (Logistics-to-GDP ratio) और राष्ट्रीय बहुविध कनेक्टिविटी फ्रेमवर्क के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रसद-से-जीडीपी अनुपात किसी राष्ट्र के सकल आर्थिक उत्पादन के सापेक्ष माल ढुलाई, वेयरहाउसिंग और इन्वेंट्री पर कुल घरेलू व्यय को मापता है। 2. पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान रसद लागत को कम करने के उद्देश्य से कई केंद्रीय मंत्रालयों में बुनियादी ढांचा नियोजन के समन्वय के लिए एक डिजिटल भू-स्थानिक मंच के रूप में कार्य करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Select an option above, then submit
Context Analysis

📖 In-Depth Fact-Check & Editorial Background

Read Article View →

This question was curated from today's in-depth analytical breakdown: पश्चिमी समर्पित माल गलियारा: रेल ढुलाई में गति क्रांति

पश्चिमी समर्पित माल गलियारा: संपूर्ण 1,506 किमी मार्ग अब परिचालित

| बुनियादी ढांचा विश्लेषण

परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु एवं अवधारणाएं

पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान
बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में समन्वय स्थापित करने वाला एकीकृत डिजिटल भू-स्थानिक ढांचा। यह 16 केंद्रीय मंत्रालयों को एक साझा मंच पर लाकर विभागीय देरी और प्रशासनिक अड़चनों को समाप्त करता है।
लॉजिस्टिक्स-जीडीपी अनुपात
कुल आर्थिक उत्पादन के सापेक्ष कच्चे माल, परिवहन और भंडारण पर होने वाले व्यय का मापक। भारत इस खर्च को वर्तमान 13–14% से घटाकर 8–9% तक सीमित करने के लक्ष्य पर कार्यरत है।
डबल-स्टैक हेवी-हॉल रेल इंजीनियरिंग
उन्नत ट्रैक संरचना जिसमें 32.5 टन एक्सल लोड क्षमता और 7.45 मीटर ऊंचे ओवरहेड विद्युत तार (High-Rise OHE) शामिल हैं। यह तकनीक 100 किमी/घंटे की गति से डबल-डेकर कंटेनर ट्रेनों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करती है।

कल का ऐतिहासिक घटनाक्रम: 19 अक्टूबर 2026 को रेल मंत्रालय के अधीनस्थ DFCCIL ने अंतिम 109 किमी लंबे वैतरणा–जेएनपीटी खंड का परिचालन शुरू कर दिया। इसके साथ ही ₹55,000 करोड़ की लागत वाला 1,506 किमी लंबा पश्चिमी समर्पित माल गलियारा पूरी तरह क्रियाशील हो गया।

उत्तर और पश्चिमी भारत के बीच औद्योगिक महामार्ग

मालगाड़ियों का सामान्य पटरियों पर घंटों खड़े रहना अब समाप्त हो चुका है। ऐतिहासिक रूप से, मिश्रित रेल पटरियों पर यात्री ट्रेनों को वरीयता मिलती थी; नतीजतन मालगाड़ियों की औसत गति 25 किमी/घंटे तक सीमित रह जाती थी। उत्तर प्रदेश के अंतर्देशीय कंटेनर डिपो से बंदरगाह तक माल पहुंचने में 60 से 70 घंटे लग जाते थे।

यह ढांचागत रुकावट अब दूर हो गई है। दादरी (उत्तर प्रदेश) से शुरू होकर हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से गुजरते हुए नवी मुंबई के जेएनपीटी तक फैला यह गलियारा अब सीधा माल परिवहन उपलब्ध कराता है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी बंदरगाहों के बीच यात्रा का समय 60 घंटे से घटकर 24 घंटे से भी कम रह गया है।

उल्लेखनीय रूप से, दादरी में यह मार्ग लुधियाना से सोननगर तक फैले 1,337 किमी लंबे पूर्वी गलियारे से सीधे जुड़ता है। इस दोहरे नेटवर्क के कारण लगभग 70% भारी माल ढुलाई पारंपरिक ब्रॉड-गेज पटरियों से अलग हो गई है।

पश्चिमी समर्पित माल गलियारे का तुलनात्मक तकनीकी विवरण
मानकपारंपरिक रेल लाइनपश्चिमी डीएफसी मानक
अधिकतम गति75 किमी/घंटा (औसत 25 किमी/घंटा)100 किमी/घंटा (औसत 65–70 किमी/घंटा)
एक्सल लोड क्षमता22.5 से 25 टन32.5 टन (भारी ढुलाई)
ट्रेन की लंबाई700 मीटर (सिंगल स्टैक)1,500 मीटर (डबल स्टैक)
ओएचई संरचनामानक 5.5 मीटर ऊंचाई7.45 मीटर हाई-राइज ओएचई

रेलवे अधिनियम, 1989 के कानूनी प्रावधानों के तहत तैयार यह स्वतंत्र ट्रैक यात्री यातायात को माल ढुलाई से पूरी तरह अलग करता है। वास्तव में, माल का आवागमन अब समय-सारणी आधारित और नियंत्रित संचालन बन गया है।

जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी से मिले वित्तीय सहयोग से निर्मित यह परियोजना स्वचालित सिग्नलिंग और लंबी मालगाड़ियों के साथ पश्चिमी तट तक एक सुरक्षित स्थलीय नहर की भांति कार्य करती है।

अर्थव्यवस्था और नागरिकों पर प्रत्यक्ष प्रभाव

पटरियों के इस पृथक्करण से राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट वाणिज्यिक लाभ उत्पन्न हो रहे हैं।

प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए आवश्यक विश्लेषण

  • पाठ्यक्रम प्रासंगिकता: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3 में बुनियादी ढांचा, आपूर्ति श्रृंखला और अंतर-मंत्रालयी नीतियां सीधे पूछी जाती हैं।
  • वित्तीय संरचना: इस परियोजना में जेआईसीए का रियायती ऋण और रेल मंत्रालय की पूंजीगत हिस्सेदारी शामिल है।
  • स्मरण रखने योग्य आंकड़े: 1,506 किमी कुल लंबाई; ₹55,000 करोड़ का पूंजीगत निवेश; तथा जेएनपीटी, मुंद्रा और पीपावाव बंदरगाहों से सीधा संयोजन।

उद्योग, व्यापार और दैनिक रेल यात्री

कारखानों को अब निश्चित समय पर कच्चा माल मिलता है। इसके विपरीत, पहले माल के बंदरगाहों पर अटके रहने से भारी विलंब शुल्क चुकाना पड़ता था।

लॉजिस्टिक्स लागत घटने से विनिर्माण इकाइयों की कार्यशील पूंजी पर दबाव घटेगा। भारी ट्रकों पर निर्भरता कम होने से डीजल खपत घटेगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

यात्री रेल संचालन के स्तर पर भी बड़ा बदलाव आया है। भारी मालगाड़ियों के हटने से दिल्ली-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर ट्रैक खाली हुए हैं। इसके परिणामस्वरूप यात्री ट्रेनों की समयबद्धता सुधरी है और अतिरिक्त वंदे भारत ट्रेनों के संचालन के लिए स्लॉट उपलब्ध हुए हैं।

आगे का परिदृश्य

जमीनी स्तर पर, समर्पित माल गलियारे का संचालन अंतर-मॉडल परिवहन व्यवस्था को मजबूती देता है। आगे की रणनीति के तहत इन मुख्य रेल लाइनों को मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों से जोड़ा जा रहा है, ताकि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र वैश्विक बाजारों में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति को सुदृढ़ कर सके।

Practice More Quizzes

Sharpen your accuracy with hundreds of curated daily MCQs.

← All Practice Questions
An unhandled error has occurred. Reload 🗙

Rejoining the server...

Rejoin failed... trying again in seconds.

Failed to rejoin.
Please retry or reload the page.

The session has been paused by the server.

Failed to resume the session.
Please retry or reload the page.