🎯 Question #199Federalism & Local Governance 📅 25 October 2026

भारत में राज्य विधान परिषदों के सृजन और उत्सादन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संसद किसी विधान परिषद को समाप्त या सृजित कर सकती है यदि संबंधित राज्य की विधानसभा साधारण बहुमत से इस आशय का प्रस्ताव पारित कर दे। 2. विधान परिषद् के सृजन या उत्सादन के लिए संसद द्वारा बनाया गया अंतिम कानून अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन माना जाता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

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This question was curated from today's in-depth analytical breakdown: संघवाद और स्थानीय शासन: भारत की शक्ति वास्तुकला

संघवाद और स्थानीय शासन: भारत की शक्ति वास्तुकला

मुख्य परीक्षा विषय एवं अवधारणाएँ

  • अनुच्छेद 169 (भारत का संविधान): राज्य विधान परिषद के सृजन या उत्सादन को नियंत्रित करता है। यह यूपीएससी और राज्य लोक सेवा आयोग की राजव्यवस्था खंड के लिए महत्वपूर्ण है।
  • राज्य चुनाव मशीनरी: क्षेत्रीय स्तर पर पारदर्शी चुनाव कराने और लोकतांत्रिक प्रोटोकॉल की सुरक्षा करने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के नेतृत्व में गठित संस्थागत ढाँचा।

मुख्य घटना: 26 अक्टूबर 2026 को, राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं ने औपचारिक रूप से बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर विधान परिषद चुनावों के दौरान मत-गणना प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चिंताएँ दर्ज कराईं।

कल्पना कीजिए एक विशाल आवासीय परिसर की, जहाँ रहने वाले लोग अपनी जलापूर्ति और सुरक्षा का प्रबंधन स्वयं करते हैं, जबकि निगम कुछ बुनियादी नियम तय करता है। आप शक्तियों का ऐसा बँटवारा कैसे करेंगे कि पूरी इमारत बिना अराजकता के चले? यही संतुलन भारत में संघवाद और स्थानीय शासन की आत्मा है।

संवैधानिक खाका

भारतीय संघवाद की यात्रा 1950 में संविधान के निर्माण के साथ शुरू हुई, जिसमें एक अर्ध-संघीय संरचना को चुना गया। अनुच्छेद 169 के तहत द्विसदनीय राज्य विधानमंडल स्थापित किए गए ताकि कानूनों को विधान परिषदों के माध्यम से विचार-विमर्श की समीक्षा मिले।

प्रमुख ऐतिहासिक पड़ाव

  • 📅 26 जनवरी 1950 — संवैधानिक शुरुआत: भारत का संविधान लागू होता है, जो संघीय ढाँचे और द्विसदनीय विधानमंडलों के प्रावधान तय करता है।
  • 📅 1992 — तृणमूल क्रांति: 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधनों द्वारा स्थानीय शासन को संस्थागत रूप दिया जाता है।
  • 📅 26 अक्टूबर 2026 — वर्तमान संदर्भ: राजनीतिक दल एमएलसी चुनावों में अमान्य वोटों की पारदर्शी जाँच की माँग करते हैं।
अवधारणा विश्लेषण: विधान परिषदों को किसी कारखाने में गुणवत्ता-नियंत्रण विभाग की तरह समझिए। जहाँ विधानसभा प्राथमिक कानून पारित करती है, वहीं विधान परिषदें त्रुटियों की जाँच करती हैं।

आगे की राह

जैसे-जैसे भारत अपनी लोकतांत्रिक जड़ों को गहरा कर रहा है, संघवाद का ध्यान प्रक्रियात्मक अखंडता और डिजिटल जवाबदेही की ओर बढ़ रहा है। राजनीतिक हितधारकों द्वारा उठाई गई ये आवाजें स्थानीय शासन और चुनावी संस्थानों को मजबूत तकनीकी सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं।

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