🎯 Question #201External Sector & Global Economy 📅 26 October 2026

भारत के बाहरी क्षेत्र और विदेशी मुद्रा प्रबंधन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. विदेशी मुद्रा अनिवासी [FCNR(B)] योजना अनिवासी भारतीयों को भारतीय बैंकों में निर्दिष्ट विदेशी मुद्राओं में जमा खाते रखने की अनुमति देती है। 2. FCNR(B) जैसी योजनाओं के तहत विदेशी मुद्रा जमा देयताएं आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में मदद करती हैं लेकिन ये ऐसी आस्थगित देयताएं हैं जिन्हें अंततः चुकानी पड़ती हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

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This question was curated from today's in-depth analytical breakdown: भारत के बाहरी क्षेत्र के सामने 170 अरब डॉलर का पुनर्भुगतान संकट

भारत के बाहरी क्षेत्र के सामने 170 अरब डॉलर का पुनर्भुगतान संकट

| संपादकीय विभाग

मुख्य घटना: वरिष्ठ फाइनेंसर उदय कोटक ने चेतावनी दी है कि FCNR(B) योजना ने भारत को तीन से पांच साल का नीतिगत सुरक्षा कवच दिया है, लेकिन इसके साथ ही 170 अरब डॉलर का भारी-भरकम पुनर्भुगतान संकट भी उत्पन्न हो रहा है।

अल्पकालिक उपाय कभी भी संरचनात्मक कमियों को दूर नहीं करते; वे केवल समस्या को आगे के लिए टालते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था का बाहरी क्षेत्र वर्तमान में इसी वित्तीय स्थिति से गुजर रहा है। जब वैश्विक व्यापार में उथल-पुथल होती है और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आयात बिल को प्रभावित करती हैं, तब देश को अपनी मुद्रा और बैलेंस शीट की रक्षा करनी होती है। यहीं पर FCNR(B) योजना एक महत्वपूर्ण वित्तीय सेतु के रूप में कार्य करती है।

भारतीय रिजर्व बैंक की निगरानी में संचालित ये विदेशी मुद्रा जमाएं, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रुपये को स्थिरता प्रदान करती हैं। हालांकि, इन वित्तीय व्यवस्थाओं के तहत जमा हुए दायित्वों को अंततः चुकाना ही होता है। वर्तमान राहत अवधि समाप्त होने के बाद देश के सामने 170 अरब डॉलर का एक विशाल पुनर्भुगतान संकट खड़ा होने जा रहा है।

शब्दावली स्पष्टीकरण

FCNR(B) योजना: एक विशेष बचत खाता जहाँ अनिवासी भारतीय अमेरिकी डॉलर या यूरो जैसी विदेशी मुद्रा जमा करते हैं, जिससे रुपये के अवमूल्यन का डर नहीं रहता और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होता है।

पुनर्भुगतान संकट: वह स्थिति जब भारी मात्रा में ऋण या जमा एक साथ परिपक्व होते हैं, जिससे बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा के बहिर्प्रवाह की आवश्यकता होती है।

आगे की राह

  1. भारतीय रिजर्व बैंक आगामी बाहरी तरलता झटकों से निपटने के लिए घरेलू बैंकिंग बैलेंस शीट को मजबूत करने के प्रयास तेज कर सकता है।
  2. नीति निर्माताओं को अगले तीन से पांच वर्षों के दौरान व्यापार घाटे के आंकड़ों पर पैनी नजर रखनी होगी।
  3. विश्लेषकों को विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव से जुड़े वृहद आर्थिक आंकड़ों का अध्ययन करना चाहिए।

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