वित्तीय सुरक्षा चक्र में दरार: 26 लाख पॉलिसियों के बंद होने के निहितार्थ
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण विषय एवं अवधारणाएं
- पर्सिस्टेंसी रेशियो (13वाँ एवं 61वाँ महीना): समय पर प्रीमियम भुगतान के बाद सक्रिय रहने वाली पॉलिसियों का प्रतिशत। यह ग्राहक विश्वास और संस्थागत दक्षता का प्रमुख मापक है।
- परिसंपत्ति-देनदारी प्रबंधन (ALM): दीर्घकालिक देनदारियों को नियमित नकद प्रवाह के साथ संतुलित करने की वित्तीय प्रक्रिया।
- पॉलिसी लैप्स एवं सरेंडर: प्रीमियम न भरने या समय से पहले निकासी के कारण पॉलिसी का समाप्त होना, जिससे सामाजिक सुरक्षा का ह्रास होता है।
'कल की घटना' और इसका संदर्भ
द डेली स्टार की एक मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, 14 वर्षों में लगभग 26 लाख जीवन बीमा पॉलिसियां समय से पहले बंद हो गईं। इसका मुख्य कारण कम पर्सिस्टेंसी दर और अनियंत्रित पॉलिसी सरेंडर है।
सुरक्षा चक्र का टूटना
दस में से दो बूंद पानी बाहर रिस जाता है। यह भारतीय बीमा क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है।
जब 26 लाख पॉलिसियां समाप्त होती हैं, तो जोखिम बढ़ता है। लाखों परिवार आर्थिक सुरक्षा खो देते हैं। साथ ही, संस्थागत निवेश का आधार कमजोर पड़ता है।
पॉलिसी लैप्स होने के मुख्य कारण
लोग अपनी पॉलिसियां क्यों छोड़ देते हैं? इसके पीछे तीन मुख्य ढांचागत कारण हैं:
- प्रथम वर्ष का उच्च कमीशन: एजेंटों को शुरुआती वर्ष में अधिक लाभ मिलता है। इसके कारण वे ग्राहक की दीर्घकालिक भुगतान क्षमता का आकलन किए बिना बिक्री करते हैं।
- आय की अनिश्चितता: ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आय का उतार-चढ़ाव प्रीमियम भुगतान में बाधक बनता है।
- ALM पर प्रतिकूल प्रभाव: बीमा कंपनियां दीर्घकालिक बुनियादी परियोजनाओं में निवेश करती हैं। पॉलिसियों के समय पूर्व बंद होने से उनका तरलता ढांचा प्रभावित होता है।
निगरानी के दो प्रमुख मीट्रिक
| संकेतक | समय सीमा | उद्देश्य |
|---|---|---|
| 13वें महीने का अनुपात | 1 वर्ष | प्रारंभिक नवीनीकरण और मिस-सेलिंग का आकलन। |
| 61वें महीने का अनुपात | 5 वर्ष | दीर्घकालिक ग्राहक जुड़ाव की माप। |
आगे का रास्ता: नीतिगत कदम
नियामक संस्थाएं सुधार प्रक्रिया में जुटी हैं। मुख्य ध्यान बिक्री और संचालन में पारदर्शिता पर है।
- कमीशन ढांचे में बदलाव: एजेंटों के लाभ को केवल पहले वर्ष तक सीमित न रखकर पूरी अवधि में वितरित करना।
- सरेंडर नियमों का मानकीकरण: ग्राहकों को शुरुआती निकास पर होने वाले नुकसान को कम करना।
- लचीला प्रीमियम विकल्प: मौसमी आय वाले परिवारों के लिए किस्तों में भुगतान की सुविधा।