🎯 Question #225Physical Geography 📅 27 October 2026

अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) और भारतीय उपमहाद्वीप पर इसके प्रभाव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अल नीनो की विशेषता पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में सतही जल का असामान्य ठंडा होना है। 2. 1950 आधार वर्ष के बाद से ऐतिहासिक मौ気क मूल्यांकनों से संकेत मिलता है कि प्रत्येक दर्ज अल नीनो घटना ने अनिवार्य रूप से भारत में गंभीर सूखा पैदा किया है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

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This question was curated from today's in-depth analytical breakdown: भौतिक भूगोल: अल नीनो और मानसून गतिशीलता का विश्लेषण

भौतिक भूगोल: अल नीनो और मानसून गतिशीलता का विश्लेषण

प्रमुख परीक्षा विषय एवं अवधारणाएँ
  • अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO): भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के सतही तापमान में होने वाली आवधिक वृद्धि, जो वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करती है। यह भूगोल और जलवायु विज्ञान के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • दक्षिण-पश्चिम मानसून गतिशीलता: थल और जल के असमान गर्म होने से संचालित होने वाली मुख्य वर्षा-वाहक पवन प्रणाली, जो भारतीय कृषि अर्थशास्त्र और आपदा प्रबंधन की रीढ़ है।

कल की मुख्य घटना: 27 अक्टूबर 2026 को जलवायु विश्लेषकों और मौसम संबंधी मूल्यांकनों ने 1950 के बाद से ऐतिहासिक अल नीनो घटनाओं की समीक्षा की। इसमें यह पाया गया कि अब तक दर्ज 16 घटनाओं में से 5 ने ऐतिहासिक रूप से भारत में गंभीर सूखे की स्थिति पैदा की है।

ज़रा कल्पना कीजिए कि आप किसी शांत ग्रामीण तालाब के ठीक बीचों-बीच एक भारी पत्थर गिराते हैं। गिरने के साथ ही पानी में हलचल होती है और लहरें बाहर की ओर बढ़ती हैं। यह हलचल अंततः किनारे के स्वरूप को बदल देती है, जलीय पौधों को तितर-बितर कर देती है और छोटी मछलियों के तैरने का रास्ता तक बदल देती है। भौतिक भूगोल के विशाल रंगमंच पर, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर बिल्कुल उसी तालाब की तरह व्यवहार करता है। जब वहाँ समुद्र की सतह का तापमान अचानक बढ़ता है, तो यह हज़ारों मील दूर अदृश्य ऊष्मप्रवैगिक लहरें पैदा करता है। ये लहरें अंततः तय करती हैं कि भारत के प्यासे खेतों को जीवनदायिनी मानसूनी वर्षा मिलेगी या उन्हें भीषण सूखे का सामना करना पड़ेगा।

हालिया मौसम संबंधी मूल्यांकनों ने इन महासागरीय गतिशीलता पर एक नया प्रकाश डाला है। 1950 के आधार वर्ष के बाद से दर्ज 16 अल नीनो घटनाओं में से ठीक 5 ऐसी रहीं जिनके कारण भारत में गंभीर सूखे की स्थिति बनी। इसका सीधा असर हमारे राष्ट्रीय कृषि उत्पादन पर पड़ा। जब वैज्ञानिक भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में तापमान की सीमाओं की निगरानी करते हैं, तो वे असल में एक ऐसी घड़ी पर नज़र रख रहे होते हैं जो ग्रामीण समृद्धि, खाद्य मुद्रास्फीति और राष्ट्रीय जल सुरक्षा का भविष्य तय करती है।

प्रभाव का क्षेत्र-वार विश्लेषण

  • 🌊 लहर 1: तत्काल क्षेत्रीय प्रभाव (कृषि और जल संसाधन): इसके प्रत्यक्ष प्रभावित लाखों सीमांत किसान हैं जिनकी खरीफ की फसलें पूरी तरह से समय पर आने वाली दक्षिण-पश्चिम मानसून वर्षा पर निर्भर करती हैं। प्रशांत महासागर में होने वाले तापमान संबंधी असामान्यता से वायुमंडलीय दबाव की पेटियाँ खिसक जाती हैं। इससे अनियमित बारिश या लंबे समय तक सूखा रहता है, जो जलाशयों को खाली कर देता है और सिंचाई के पानी को राशनिंग करने के लिए मजबूर करता है।
  • 🌊 लहर 2: आर्थिक एवं नागरिक प्रभाव (मुद्रास्फीति और ग्रामीण आजीविका): जब कम बारिश से फसल उत्पादन घटता है, तो देश भर में खाद्यान्न की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। इससे घरेलू बजट बिगड़ जाता है और ग्रामीण क्रय शक्ति कम हो जाती है। व्यवहार में, सरकारों को राजकोषीय राहत पैकेज देने, अनाज के भंडारों का प्रबंधन करने तथा सूखा-निवारण रोज़गार योजनाओं को लागू करने के लिए विवश होना पड़ता है।
  • 🌊 लहर 3: दीर्घकालिक रणनीतिक प्रभाव (जलवायु लचीलापन और अनुकूलन): आने वाले 5 से 10 वर्षों को ध्यान में रखते हुए, भारत को अपनी जलवायु-अनुकूल बुनियादी संरचना को तेजी से बढ़ाना होगा। इसमें सूक्ष्म-सिंचाई नेटवर्क का विस्तार करना, मजबूत नदी जोड़ो ग्रिड का निर्माण करना और बार-बार आने वाले चरम जलवायु चक्रों से खाद्य सुरक्षा बचाने के लिए मौसम संबंधी मॉडलिंग को उन्नत करना शामिल है।
आवश्यक शब्दावली एवं परिभाषाएँ

अल नीनो: एक ऐसा जलवायु पैटर्न जिसमें पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का सतही पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप में वर्षा कम हो जाती है।

तापमान असामान्यता: दीर्घकालिक औसत तापमान बेसलाइन से होने वाला विचलन, जो जलवायु परिवर्तन पर नज़र रखने का प्राथमिक पैमाना है।

भविष्य की रूपरेखा मैट्रिक्स

लक्ष्य तिथि / चरणअपेक्षित मीट्रिकप्रमुख समीक्षा जाँच बिंदु
वर्ष 2027 की पहली तिमाहीप्रशांत महासागर की सतह के तापमान की निगरानीराष्ट्रीय पूर्वानुमान एजेंसियों द्वारा मध्यावधि मौसम संबंधी समीक्षा
वर्ष 2027 की तीसरी तिमाहीखरीफ फसल की उपज और जलाशय के जल संग्रहण का आकलनकृषि मंत्रालय द्वारा आकस्मिक योजना मूल्यांकन
वर्ष 2030-2035राष्ट्रव्यापी जलवायु-अनुकूल सिंचाई का विस्तारजल संसाधन प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा बफर स्टॉक का दशकीय ऑडिट

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