🎯 Question #240Performing Arts 📅 29 October 2026

भारत में संरक्षित ऐतिहासिक स्मारकों को नियंत्रित करने वाले विधायी ढांचे के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष (AMASR) अधिनियम, 1958 राष्ट्रीय रूप से महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संरचनाओं की सुरक्षा और संरक्षण को विनियमित करता है। 2. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) संस्कृति मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्य करता है। दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

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This question was curated from today's in-depth analytical breakdown: जंतर-मंतर पर इंडिया द्विवार्षिकी: विरासत संग कला

प्रदर्शन कलाओं का नया मंच: विरासत और आधुनिक सृजन का संगम

कल क्या हुआ: 29 अक्टूबर 2026 को सांस्कृतिक आयोजकों ने घोषणा की कि 'इंडिया द्विवार्षिकी 2026-2027' नई दिल्ली में जंतर-मंतर जैसी 18वीं शताब्दी की खगोलीय वेधशालाओं में सजीव प्रदर्शन कलाओं का आयोजन करेगी।

मूक स्मारकों से जीवंत परिदृश्य तक

दशकों से जंतर-मंतर देखने का मतलब केवल रस्सियों के पीछे खड़े होकर पत्थरों के यंत्रों को देखना था। प्रदर्शन कलाएं बंद गैलरी तक सीमित थीं। दोनों क्षेत्र अलग-अलग रहे।

इंडिया द्विवार्षिकी 2026-2027 इस व्यवस्था को बदलती है। स्थल-विशिष्ट समाकलन पूरे ऐतिहासिक परिसर को एक सजीव मंच में परिवर्तित कर देता है। ऐतिहासिक दृष्टि से, जयपुर के महाराजा जयसिंह द्वितीय ने 1724 में इस वेधशाला का निर्माण कराया था। व्यावहारिक रूप में, इस 302 साल पुरानी इमारत के प्रांगण में नृत्य, संगीत और रंगमंच का समावेश पुरानी वास्तुकला को सजीव कला से जोड़ता है।

ढांचागत तुलना: पूर्व स्थिति बनाम नवीन पहल

मापदंडपूर्व स्थितिसंशोधित स्थिति (2026-2027)व्यावहारिक प्रभाव
आयोजन स्थलबंद इंडोर गैलरी और विशेष केंद्र।यूनेस्को से जुड़े सार्वजनिक विरासत स्थल (जैसे जंतर-मंतर)।कला को आम सार्वजनिक स्थलों तक पहुँचाना।
नियामकीय ढांचाAMASR अधिनियम 1958 के तहत केवल संरक्षण।सुरक्षा और सजीव कला का संतुलन साधने वाला समावेश।सुरक्षित स्मारकों में सफल आयोजन संभव होना।
दर्शकों की पहुंचटिकट-आधारित बंद स्थान।विस्तृत शहरी ढांचा; नागरिकों और छात्रों के लिए सुलभ।सृजनात्मक विधाओं से जन-सामान्य का जुड़ाव बढ़ना।
सांस्कृतिक मॉडलवास्तुकला का कलाओं से पृथक प्रदर्शन।मूर्त वास्तुकला (1724) और अमूर्त कला का संगम।ऐतिहासिक शहरी केंद्रों का पुनरुद्धार।

प्रमुख हितधारक और प्रभाव

यह नीतिगत बदलाव कई वर्गों को सीधे प्रभावित करता है:

  • प्रदर्शन कलाकार: ऐतिहासिक वास्तुकला के साथ सीधे संवाद करने वाले खुले मंच प्राप्त करते हैं।
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एवं संस्कृति मंत्रालय: AMASR अधिनियम 1958 के नियमों के तहत स्मारकों को बिना क्षति पहुंचाए कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
  • आम नागरिक एवं छात्र: सार्वजनिक स्थलों पर उच्च स्तरीय प्रदर्शन कलाओं को देखने का अवसर पाते हैं।
  • प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी: मूर्त विरासत और अमूर्त नीतियों के व्यावहारिक अंतर्संबंध को समझते हैं।

आगे की राह

AMASR अधिनियम 1958 के तहत संरक्षण कार्य अब केवल इमारतों की देखभाल तक सीमित नहीं है। इसमें जन-सांस्कृतिक भागीदारी को जोड़ा गया है। इसके विपरीत, कला प्रदर्शनियों का बहु-स्तरीय प्रारूप आम जनता और शास्त्रीय कलाओं के बीच की दूरी कम करता है। आगे की राह में, 1724 के स्मारकों का यह उपयोग सांस्कृतिक सहभागिता और शहरी पर्यटन का एक व्यावहारिक ढांचा प्रस्तुत करता है।

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