Infrastructure & Landmarks 📅 31 October 2026 ✍️ Siddharth Roy

उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल मार्ग: पीर पंजाल का इंफ्रास्ट्रक्चर

उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल मार्ग: पीर पंजाल का इंफ्रास्ट्रक्चर

परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण विषय एवं अवधारणाएं

  • राष्ट्रीय महत्व की परियोजना (2002): रणनीतिक और आर्थिक प्राथमिकता वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए एक वैधानिक वर्गीकरण, जो समर्पित केंद्रीय धन और अंतर-मंत्रालयी निगरानी की अनुमति देता है।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 307: एक संवैधानिक प्रावधान जो संसद को अंतरराज्यीय व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए प्राधिकारी नियुक्त करने की शक्ति प्रदान करता है।
  • सीस्मिक जोन-V इंजीनियरिंग: भारत में उच्चतम भूकंपीय जोखिम वर्गीकरण, जिसके लिए तीव्र भू-कंपन और विवर्तनिक दबाव सहने वाले डिजाइन आवश्यक हैं।
  • रेलवे अधिनियम, 1989: भूमि अधिग्रहण, सुरक्षा प्रमाणन और निर्माण मानकों को नियंत्रित करने वाला प्राथमिक वैधानिक ढांचा।

कल की बड़ी खबर

31 अक्टूबर, 2026 को रेल मंत्रालय ने ₹41,119 करोड़ की लागत वाली 272 किलोमीटर लंबी 'उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक' (USBRL) परियोजना के पूर्ण व्यावसायिक परिचालन की घोषणा की।


दुर्गम पीर पंजाल पर विजय: जब भूगोल पर भारी पड़ी इंजीनियरिंग

राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर सर्दियों की स्थिति कठिन होती थी। पीर पंजाल श्रृंखला में भूस्खलन से रास्ते बंद हो जाते थे। ट्रकों की लंबी कतारें लग जाती थीं। सेब की फसलें रास्ते में सड़ जाती थीं। घाटी की भौगोलिक नाकाबंदी कई दिनों तक जारी रहती थी।

रेलवे लाइन के निर्माण ने इस चुनौती को समाप्त कर दिया। पटरियां बिछाने के लिए रियासी थ्रस्ट जोन की जटिल भूवैज्ञानिक स्थितियों का सामना करना पड़ा। रेलवे अधिनियम, 1989 के वैधानिक अधिकार के तहत काम शुरू हुआ। इंजीनियरों ने सुरंगें खोदीं, घाटियों पर पुल बनाए और कठोर पर्वतीय तूफानों को सहने वाली संरचनाएं तैयार कीं।

समय-रेखा: 24 वर्षों का इंजीनियरिंग सफर

  • 2002 — राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित: संसद ने USBRL को राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का दर्जा दिया ताकि केंद्रीय बजट से निर्बाध धनराशि प्राप्त हो सके।
  • फरवरी 2022 — T-49 सुरंग का निर्माण पूर्ण: इंजीनियरों ने 12.77 किमी लंबी T-49 सुरंग की खुदाई पूरी की। यह भारत की सबसे लंबी रेल सुरंग बनी।
  • अगस्त 2022 — चिनाब ब्रिज आर्च का निर्माण: चिनाब नदी के तल से 359 मीटर ऊंचे आर्च का निर्माण पूरा हुआ। इसमें 28,660 मीट्रिक टन संरचनात्मक स्टील का उपयोग किया गया।
  • 31 अक्टूबर, 2026 — पूर्ण व्यावसायिक परिचालन: 272 किलोमीटर लंबा मार्ग पूरी तरह चालू हो गया। जम्मू और श्रीनगर के बीच यात्रा का समय 7 घंटे से घटकर 3.5 घंटे से कम हो गया।


भावी परिदृश्य: आर्थिक और रणनीतिक परिवर्तन का आधार

पीर पंजाल के पार रेल सेवा शुरू होने से उत्तर भारत के लॉजिस्टिक्स परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है।

USBRL परियोजना: मुख्य आंकड़े
मानदंडपरियोजना विवरण
कुल स्वीकृत लागत₹41,119 करोड़
कुल मार्ग लंबाई272 किलोमीटर
यात्रा समय (जम्मू से श्रीनगर)7 घंटे से घटकर <3.5 घंटे
सुरंग नेटवर्क38 सुरंगों में 119 किलोमीटर
सर्वोच्च संरचनात्मक बिंदु359 मीटर ऊंचा चिनाब ब्रिज

मालगाड़ियों का परिचालन शुरू हो चुका है। कृषि उत्पाद अब कुछ ही घंटों में दिल्ली और मुंबई की मंडियों तक पहुंच सकते हैं। इससे समय और उत्पाद दोनों की बचत होती है। व्यापारिक लाभ के साथ-साथ यह रेल नेटवर्क सीमाओं पर सैन्य रसद आपूर्ति को भी सुदृढ़ करता है।

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Q1 भारत में अंतर-राज्यीय और क्षेत्रीय वाणिज्य से संबंधित संवैधानिक ढांचे और प्रशासनिक प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. भारत के संविधान का अनुच्छेद 307 संसद को व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता से संबंधित प्रावधानों के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एक प्राधिकरण नियुक्त करने का स्पष्ट अधिकार देता है। 2. मेगा-बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को 'राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएं' के रूप में वर्गीकृत करना विशेष रूप से भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 142 के तहत जारी न्यायिक आदेशों के माध्यम से संचालित और निष्पादित किया जाता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

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Q2 हिमालयी क्षेत्रों में अधिक ऊंचाई पर रेलवे निर्माण से जुड़ी निम्नलिखित सिविल इंजीनियरिंग और भूवैज्ञानिक विशेषताओं पर विचार करें: 1. भूकंपीय क्षेत्र-V (Seismic Zone-V) की संरचनाओं को गंभीर भू-त्वरण और गतिशील विवर्तनिक तनाव को अवशोषित करने के लिए उच्च-डक्टिलिटी वाले स्टील और विस्फोट-प्रतिरोधी जोड़ों के साथ डिजाइन किया जाता है। 2. रेलवे अधिनियम, 1989 भारत में प्रमुख रेल परियोजनाओं के लिए निर्माण मानकों, भूमि अधिग्रहण और सुरक्षा प्रमाणन को नियंत्रित करने वाला मुख्य विधाई ढांचा है। 3. रियासी थ्रस्ट ज़ोन पूर्ण विवर्तनिक शांति की विशेषता वाला एक स्थिर भूवैज्ञानिक कवच है, जो विशेष सुरंग सुदृढीकरण की आवश्यकता को समाप्त करता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कितने सही हैं?

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